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शेयर बाजार की मूल बातें (Basics of Stock Market)

फ़रवरी 12, 2026
शेयर मार्केट क्या है?

शेयर मार्केट एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ कंपनियों के शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं। यह निवेशकों को कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदने और बेचने का मौका देता है।

शेयर मार्केट की परिभाषा

शेयर मार्केट, जिसे स्टॉक मार्केट भी कहते हैं, सार्वजनिक कंपनियों के शेयरों का व्यापार करने वाला बाजार है। यहाँ निवेशक कंपनियों के स्वामित्व वाले हिस्से (शेयर) खरीदकर मुनाफा कमा सकते हैं। कंपनियाँ इससे पूंजी जुटाती हैं।

यह कैसे काम करता है

यह आपूर्ति और मांग पर आधारित है—शेयरों की मांग बढ़ने पर कीमतें ऊपर जाती हैं। भारत में BSE और NSE मुख्य स्टॉक एक्सचेंज हैं, जिन्हें SEBI नियंत्रित करता है। ट्रेडिंग डीमैट खाते के जरिए होती है।

मुख्य प्रकार

  • प्राइमरी मार्केट: नई शेयर जारी होते हैं, जैसे IPO।
  • सेकेंडरी मार्केट: मौजूदा शेयरों का व्यापार होता है।
शेयर बाजार कैसे काम करता है?

शेयर बाजार आपूर्ति और मांग के सिद्धांत पर काम करता है, जहाँ निवेशक कंपनियों के शेयर खरीदते-बेचते हैं। यह प्रक्रिया स्टॉक एक्सचेंज जैसे NSE और BSE के माध्यम से होती है।

ट्रेडिंग प्रक्रिया

निवेशक ब्रोकर के जरिए ऑर्डर देते हैं, जो एक्सचेंज को भेजा जाता है। एक्सचेंज खरीदार और विक्रेता का मिलान करता है, फिर ट्रेड पूरा होने पर शेयर और पैसे का आदान-प्रदान होता है। SEBI इसकी निगरानी करता है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

मुख्य चरण

  • ऑर्डर प्लेसमेंट: डीमैट खाते से ब्रोकर को निर्देश।
  • मैचिंग: एक्सचेंज पर उपलब्ध विक्रेताओं से मिलान।
  • सेटलमेंट: T+1 आधार पर शेयर ट्रांसफर (अगले दिन)।

मूल्य निर्धारण

शेयर की कीमत कंपनी के प्रदर्शन, बाजार भावना और आर्थिक कारकों से प्रभावित होती है। मांग बढ़ने पर कीमतें गिरती या चढ़ती हैं।

Follow-ups

शेयर बाजार में निवेश कैसे शुरू करें

शेयर बाजार के जोखिम क्या हैं

शेयर कैसे खरीदें बेचें स्टेप बाय स्टेप

NSE और BSE में क्या अंतर है

शेयर बाजार ट्रेडिंग समय क्या है

Demat Account क्या है?:

डीमैट अकाउंट शेयर बाजार में निवेश के लिए जरूरी इलेक्ट्रॉनिक खाता है, जो शेयरों को डिजिटल रूप में स्टोर करता है। यह भौतिक प्रमाणपत्रों की जगह लेता है और ट्रेडिंग को आसान बनाता है।

डीमैट अकाउंट क्या है

डीमैट का पूरा नाम डिमैटेरियलाइज्ड अकाउंट है, जो डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (जैसे ब्रोकर) द्वारा संचालित होता है। NSE और BSE जैसे एक्सचेंजों पर ट्रेडिंग के लिए यह अनिवार्य है। CDSL या NSDL जैसे डिपॉजिटरी इससे जुड़े होते हैं।

प्रकार

  • रेगुलर डीमैट: भारतीय निवेशकों के लिए, शेयर खरीद-बिक्री हेतु।
  • बेसिक सर्विस डीमैट: कम होल्डिंग वाले निवेशकों के लिए कम चार्ज।
  • रिपाट्रिएशन और नॉन-रिपाट्रिएशन: NRI के लिए विदेशी लेन-देन के आधार पर।

कैसे काम करता है

शेयर खरीदने पर वे ऑटोमैटिक डीमैट में क्रेडिट हो जाते हैं, बेचने पर डेबिट। ट्रेडिंग सेटलमेंट T+1 पर होता है। नामांकन सुविधा से मृत्यु पर ट्रांसफर आसान।

Follow-ups

डीमैट अकाउंट कैसे खोलें

डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट में क्या अंतर है

डीमैट अकाउंट के प्रकार कौन से हैं

डीमैट अकाउंट खोलने के लिए जरूरी दस्तावेज

डीमैट अकाउंट के चार्जेस कितने हैं

NSE और BSE में अंतर: निफ्टी (Nifty) और सेंसेक्स (Sensex) क्या होते हैं?

NSE और BSE भारत के दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज हैं, जबकि निफ्टी और सेंसेक्स उनके मुख्य इंडेक्स हैं जो बाजार की सेहत दर्शाते हैं।

NSE और BSE में अंतर

NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) 1992 में स्थापित हुआ, इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पर फोकस करता है और उच्च तरलता व डेरिवेटिव्स में मजबूत है। BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) 1875 का सबसे पुराना एक्सचेंज है, जिसमें अधिक कंपनियाँ लिस्टेड हैं। दोनों SEBI द्वारा नियंत्रित हैं, लेकिन NSE में ट्रेडिंग वॉल्यूम ज्यादा होता है।

विशेषताNSEBSE
स्थापना19921875
मुख्य इंडेक्सनिफ्टी 50सेंसेक्स 30
लिस्टेड कंपनियाँकम, लेकिन तरलता अधिकअधिक संख्या
फोकसडेरिवेटिव्स, उच्च वॉल्यूमविविध सिक्योरिटीज

निफ्टी क्या है

निफ्टी (Nifty 50) NSE का बेंचमार्क इंडेक्स है, जो NSE पर टॉप 50 कंपनियों के प्रदर्शन को मापता है। यह फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन पर आधारित है और बाजार की दिशा दिखाता है।

सेंसेक्स क्या है

सेंसेक्स (Sensex) BSE का इंडेक्स है, जिसमें टॉप 30 कंपनियाँ शामिल हैं। यह बाजार की संवेदनशीलता को ट्रैक करता है और लंबे समय से भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रतिबिंब माना जाता है।

IPO क्या होता है?:

IPO (Initial Public Offering) एक प्राइवेट कंपनी के शेयरों को पहली बार जनता को बेचने की प्रक्रिया है। इससे कंपनी पूंजी जुटाती है और पब्लिक लिमिटेड कंपनी बन जाती है।

IPO क्या है

IPO का फुल फॉर्म इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग है, जिसमें कंपनी SEBI की मंजूरी के बाद शेयर जारी करती है। यह प्राइमरी मार्केट का हिस्सा है, जहाँ नई शेयर बिकते हैं। निवेशक डीमैट अकाउंट से आवेदन करते हैं।

IPO कैसे काम करता है

  • कंपनी प्राइस बैंड तय करती है और रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस जारी करती है।
  • निवेशक ASBA या UPI से अप्लाई करते हैं; आवंटन लॉटरी या प्रो राटा आधार पर होता है।
  • लिस्टिंग के बाद शेयर NSE/BSE पर ट्रेड होने लगते हैं।

प्रकार

बुक बिल्डिंग: निवेशकों की बोली से कीमत तय।

फिक्स्ड प्राइस: निश्चित मूल्य पर शेयर।

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