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विश्लेषण और रणनीतियां (Analysis & Strategies)

फ़रवरी 13, 2026

शेयर बाजार में विश्लेषण स्टॉक मूल्यांकन और निर्णय लेने के लिए किया जाता है, जबकि रणनीतियाँ निवेश या ट्रेडिंग लक्ष्यों पर आधारित होती हैं। मुख्यतः मौलिक, तकनीकी और सेंटिमेंटल विश्लेषण उपयोग होते हैं।

विश्लेषण के प्रकार

  • मौलिक विश्लेषण: कंपनी की वित्तीय स्थिति (बैलेंस शीट, आय विवरण), उद्योग और अर्थव्यवस्था का अध्ययन; लॉन्ग-टर्म निवेश के लिए।
  • तकनीकी विश्लेषण: चार्ट, पैटर्न, इंडिकेटर्स (RSI, MACD, मूविंग एवरेज) से मूल्य ट्रेंड भविष्यवाणी; शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के लिए।
  • सेंटिमेंटल विश्लेषण: बाजार की भावना, समाचार, सोशल मीडिया से धारणा मापना।

रणनीतियाँ

  • लॉन्ग-टर्म: वैल्यू इन्वेस्टिंग (कम मूल्य पर खरीद), ग्रोथ इन्वेस्टिंग (तेज बढ़ती कंपनियाँ)।
  • शॉर्ट-टर्म: मोमेंटम ट्रेडिंग (ट्रेंड फॉलो), स्विंग ट्रेडिंग (कीमत स्विंग्स)।
  • डिवर्सिफाइड: SIP, इंडेक्स फंड से जोखिम कम।

टूल्स व टिप्स

TradingView या Zerodha जैसे प्लेटफॉर्म चार्ट विश्लेषण के लिए उपयोगी। हमेशा स्टॉप-लॉस लगाएँ और रिसर्च करें।

Fundamental Analysis

मौलिक विश्लेषण में कंपनी की बैलेंस शीट और प्रॉफिट एंड लॉस (P&L) अकाउंट चेक करके वित्तीय स्वास्थ्य का मूल्यांकन किया जाता है। ये NSE/BSE वेबसाइट, कंपनी वार्षिक रिपोर्ट या स्क्रीनर टूल्स जैसे Tickertape/Screener से उपलब्ध होते हैं।

बैलेंस शीट कैसे चेक करें

बैलेंस शीट कंपनी की संपत्ति (Assets), दायित्व (Liabilities) और शेयरधारकों इक्विटी को दर्शाती है—Assets = Liabilities + Equity।

  • करंट एसेट्स: नकदी, इन्वेंटरी—तेज बिक्री योग्य चेक करें।
  • कर्ज: Debt/Equity रेशियो <1 अच्छा; उच्च कर्ज जोखिम दर्शाता है।
  • इक्विटी: रिजर्व बढ़ रहे हों तो मजबूत। ट्रेंड देखें (पिछले 5 वर्ष)।

प्रॉफिट एंड लॉस (P&L) कैसे चेक करें

P&L आय विवरण है, जो रेवेन्यू, खर्च, प्रॉफिट दिखाता है।

  • रेवेन्यू: लगातार बढ़ाव देखें।
  • नेट प्रॉफिट: मार्जिन (प्रॉफिट/रेवेन्यू) >10-15% अच्छा; ROE >15%।
  • EPS: बढ़ता हुआ हो। खर्च नियंत्रण चेक करें।

स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

  1. कंपनी वार्षिक रिपोर्ट डाउनलोड करें (bseindia.com या nseindia.com)।
  2. रेशियो कैलकुलेट करें: P/E, ROCE, Debt/Equity।
  3. उद्योग औसत से तुलना करें; कैश फ्लो भी देखें।
Technical Analysis

तकनीकी विश्लेषण में चार्ट और इंडिकेटर्स जैसे RSI व MACD मूल्य पैटर्न व ट्रेंड से भविष्य की कीमतों का अनुमान लगाते हैं। ये शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के लिए उपयोगी हैं।

चार्ट के प्रकार

  • लाइन चार्ट: क्लोजिंग प्राइस को लाइन से जोड़ता है, सरल ट्रेंड दिखाता है।
  • बार चार्ट: प्रत्येक पीरियड के ओपन, हाई, लो, क्लोज (OHLC) दिखाता है।
  • कैंडलस्टिक चार्ट: बॉडी (ओपन-क्लोज) व विक्स (हाई-लो) से भावना दर्शाता; हरा=बुलिश, लाल=बेयरिश।

मुख्य पैटर्न

  • रिवर्सल: हेड एंड शोल्डर्स (ट्रेंड बदलाव), डबल टॉप/बॉटम (M/W आकार)।
  • कंटीन्यूएशन: त्रिकोण, फ्लैग, पेनन्ट (ट्रेंड जारी रखने वाले)।

RSI और MACD समझें

इंडिकेटरअर्थउपयोग
RSI (14 अवधि)0-100 स्केल; >70=ओवरबॉट (बेचें), <30=ओवरसोल्ड (खरीदें)।मोमेंटम मापता है।
MACDMACD लाइन – सिग्नल लाइन क्रॉसओवर; हिस्टोग्राम डाइवर्जेंस।ट्रेंड व मोमेंटम।

Stop Loss

स्टॉप लॉस ट्रेडिंग में नुकसान को सीमित करने वाला ऑटोमेटेड ऑर्डर है, जो निर्धारित कीमत पर पहुँचते ही शेयर बेच देता है। यह जोखिम प्रबंधन का महत्वपूर्ण उपकरण है।

स्टॉप लॉस क्या है

स्टॉप लॉस एक पूर्व-निर्धारित मूल्य स्तर है, जहाँ ट्रेडर का ऑर्डर सक्रिय हो जाता है। उदाहरण: ₹100 पर खरीदा शेयर ₹90 पर गिरे तो ऑटो बिक्री हो जाती है, नुकसान ₹10 तक सीमित। यह इंट्राडे या लॉन्ग-टर्म दोनों में उपयोगी है।

प्रकार

  • फिक्स्ड स्टॉप लॉस: निश्चित कीमत पर (जैसे ₹90)।
  • ट्रेलिंग स्टॉप लॉस: कीमत बढ़ने पर स्तर ऊपर शिफ्ट होता है, लाभ लॉक करता है।
  • स्टॉप लिमिट: स्टॉप के बाद लिमिट ऑर्डर ट्रिगर।

कैसे लगाएँ

ब्रोकर ऐप (Zerodha, Angel One) पर ट्रेड प्लेस करते समय स्टॉप लॉस प्राइस सेट करें। इंट्राडे में 1-2% नीचे रखें; हमेशा लगाएँ ताकि भावनाएँ हावी न हों।

Portfolio Diversification

पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन अपने निवेश को विभिन्न एसेट्स, सेक्टर्स या उपकरणों में फैलाने की रणनीति है, ताकि एक ही शेयर या सेक्टर में सारा पैसा लगाने से होने वाले नुकसान से बचा जा सके। इससे जोखिम कम होता है और स्थिर रिटर्न मिलता है।

डाइवर्सिफिकेशन क्यों जरूरी

एक ही शेयर में सारा पैसा लगाना जोखिम भरा है—कंपनी खराब प्रदर्शन करे तो पूरी पूंजी डूब सकती है। विविधीकरण से एक क्षेत्र के नुकसान को दूसरे के लाभ से बैलेंस किया जाता है। उदाहरण: 2020 में IT स्टॉक्स चढ़े, जबकि अन्य सेक्टर्स गिरे।

कैसे करें विविधीकरण

  • एसेट क्लास: 50% इक्विटी, 30% डेट (FD/बॉन्ड), 10% गोल्ड, 10% म्यूचुअल फंड।
  • सेक्टर: बैंकिंग, IT, फार्मा, FMCG में बाँटें (5-7 स्टॉक्स से ज्यादा न लें)।
  • मार्केट कैप: 40% लार्ज-कैप, 30% मिड-कैप, 20% स्मॉल-कैप।

सही आवंटन उदाहरण

निवेशक प्रकारइक्विटीडेटगोल्ड/अन्य
आक्रामक (युवा)70%20%10%
संतुलित50%40%10%
रूढ़िवादी30%60%10%

SIP और इंडेक्स फंड से आसानी से शुरू करें; सालाना रिव्यू करें।

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