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निवेश और ट्रेडिंग के प्रकार (Investment & Trading Types)

फ़रवरी 12, 2026
निवेश और ट्रेडिंग के प्रकार

शेयर बाजार में निवेश लंबी अवधि के लिए संपत्ति बढ़ाने पर केंद्रित होता है, जबकि ट्रेडिंग अल्पकालिक मूल्य उतार-चढ़ाव से लाभ कमाने का तरीका है। दोनों के प्रकार जोखिम और रणनीति के आधार पर भिन्न होते हैं।

निवेश के प्रकार

निवेश मुख्यतः इक्विटी, डेट और हाइब्रिड में बँटे हैं।

  • इक्विटी निवेश: स्टॉक या म्यूचुअल फंड में, लंबे समय के लिए विकास की उम्मीद (जैसे निफ्टी 50 इंडेक्स फंड)।
  • डेट निवेश: बॉन्ड, FD या PPF में, स्थिर आय और कम जोखिम।
  • हाइब्रिड: म्यूचुअल फंड जो स्टॉक व बॉन्ड मिश्रित करते हैं।

ट्रेडिंग के प्रकार

ट्रेडिंग समयसीमा पर आधारित होती है।

  • इंट्राडे: उसी दिन खरीद-बिक्री, उच्च जोखिम।
  • स्विंग: कुछ दिनों से हफ्तों तक पोजीशन होल्ड।
  • पोजीशनल: हफ्तों से महीनों तक, ट्रेंड फॉलो।
  • ऑप्शंस/फ्यूचर्स: डेरिवेटिव्स में सट्टा।

मुख्य अंतर

विशेषतानिवेशट्रेडिंग
अवधिलंबी (वर्षों)छोटी (दिन/हफ्ते)
फोकसविकास, डिविडेंडमूल्य उतार-चढ़ाव
जोखिममध्यम-कमउच्च

Intraday Trading

इंट्राडे ट्रेडिंग उसी दिन शेयरों को खरीदने और बेचने की प्रक्रिया है, जिसमें बाजार बंद होने से पहले सभी पोजीशन समाप्त करनी होती हैं। यह अल्पकालिक मूल्य उतार-चढ़ाव से लाभ कमाने पर केंद्रित है।

इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है

इंट्राडे ट्रेडिंग, जिसे डे ट्रेडिंग भी कहते हैं, में सुबह खरीदे गए शेयर शाम तक बेच दिए जाते हैं। इसमें शेयरों का स्वामित्व ट्रांसफर नहीं होता, बल्कि ब्रोकर के जरिए सेटलमेंट होता है। भारत में NSE/BSE पर सुबह 9:15 से दोपहर 3:30 तक ट्रेडिंग होती है।

कैसे काम करता है

  • ट्रेडर डीमैट अकाउंट से ब्रोकर ऐप पर ऑर्डर देते हैं (मार्केट या लिमिट ऑर्डर)।
  • छोटे प्राइस मूवमेंट का फायदा उठाते हुए खरीद-बिक्री, जैसे ₹250 पर खरीदकर ₹260 पर बेचना।
  • बाजार बंद होने पर ऑटो स्क्वेयर ऑफ, जिसमें ब्रोकरेज और अन्य शुल्क कटते हैं।

फायदे व जोखिम

जोखिम: उच्च अस्थिरता, समय की जरूरत, मार्जिन कॉल का खतरा। शुरुआती निवेशकों के लिए उपयुक्त नहीं।

फायदे: कोई ओवरनाइट जोखिम नहीं, ज्यादा ट्रेडिंग मौके, लीवरेज सुविधा।

Long-term Investing

लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग शेयर बाजार में लंबी अवधि (आमतौर पर 3 वर्ष से अधिक) के लिए शेयर या संपत्ति रखने की रणनीति है। यह कंपाउंडिंग और बाजार उतार-चढ़ाव को सहने पर आधारित है।

लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग क्या है

यह स्टॉक, म्यूचुअल फंड या ETF में निवेश है, जहाँ लक्ष्य वर्षों में धन वृद्धि है। भारत में निफ्टी या सेंसेक्स इंडेक्स फंड लोकप्रिय हैं, जो ऐतिहासिक रूप से 10-12% सालाना रिटर्न देते हैं। ट्रेडिंग के विपरीत, यह दैनिक उतार-चढ़ाव की चिंता नहीं करता।

फायदे

  • कंपाउंडिंग: ब्याज पर ब्याज से धन तेजी से बढ़ता है।
  • कम जोखिम: शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी औसत हो जाती है।
  • टैक्स लाभ: 1 वर्ष बाद LTCG टैक्स 12.5% (₹1.25 लाख से ऊपर)।

जोखिम

  • लिक्विडिटी कम—आपातकाल में बेचना नुकसानदेह।
  • खराब स्टॉक चयन से स्थायी हानि संभव। विविधीकरण जरूरी।

शुरुआत कैसे करें

डीमैट अकाउंट खोलें, ब्लू-चिप स्टॉक चुनें, SIP से नियमित निवेश करें। धैर्य रखें।

Penny Stocks

पेनी स्टॉक्स कम कीमत (आमतौर पर ₹10 या ₹20 से कम) वाले छोटी कंपनियों के शेयर हैं, जो उच्च रिटर्न की संभावना देते हैं लेकिन बहुत जोखिम भरे होते हैं। भारत में ये NSE या BSE पर ट्रेड होते हैं, लेकिन तरलता कम होने से कीमतें आसानी से मैनिपुलेट हो सकती हैं।

पेनी स्टॉक्स क्या हैं

ये स्मॉल-कैप या माइक्रो-कैप कंपनियों के शेयर हैं, जिनका मार्केट कैप ₹1000 करोड़ से कम होता है। कम कीमत के कारण छोटे निवेशक आकर्षित होते हैं, लेकिन अस्थिरता अधिक होती है। उदाहरण: Vodafone Idea या कुछ PSU बैंक कभी-कभी इस श्रेणी में आते हैं।

विशेषताएँ

  • कम तरलता: खरीद-बिक्री में देरी।
  • उच्च अस्थिरता: कीमतें तेजी से बदलती हैं।
  • जोखिम: धोखाधड़ी, खराब फंडामेंटल्स का खतरा।

फायदे व नुकसान

विशेषताफायदेनुकसान
रिटर्नउच्च वृद्धि संभावनापूंजी खोने का जोखिम
निवेशकम पूंजी से शुरूआतमैनिपुलेशन, कम जानकारी

शुरुआती निवेशकों को पेनी स्टॉक्स से दूर रहना चाहिए; रिसर्च और विविधीकरण जरूरी

Dividend Stocks

डिविडेंड स्टॉक्स वे शेयर हैं जो नियमित रूप से लाभांश (डिविडेंड) देते हैं, अर्थात् कंपनी अपने मुनाफे का हिस्सा शेयरधारकों को नकद या अतिरिक्त शेयरों के रूप में वितरित करती है। ये आमतौर पर स्थिर बड़ी कंपनियाँ होती हैं, जो आय उत्पन्न करने वाले निवेश के लिए उपयुक्त हैं।

डिविडेंड स्टॉक्स क्या हैं

ये ब्लू-चिप या लार्ज-कैप कंपनियों के शेयर हैं, जो सालाना या तिमाही डिविडेंड का भुगतान करती हैं। डिविडेंड यील्ड (शेयर मूल्य का % रूप में डिविडेंड) 2-6% तक हो सकती है। भारत में ITC, कोल इंडिया या HCL जैसी कंपनियाँ उदाहरण हैं।

फायदे

  • नियमित आय: पोर्टफोलियो से निष्क्रिय आय, रिटायरमेंट के लिए अच्छा।
  • कम अस्थिरता: ग्रोथ स्टॉक्स से कम उतार-चढ़ाव।
  • कंपाउंडिंग: डिविडेंड को रीइन्वेस्ट करने से लंबी अवधि में वृद्धि।

जोखिम

  • कंपनी डिविडेंड काट सकती है यदि मुनाफा कम हो।
  • उच्च यील्ड वाले स्टॉक्स में फंडामेंटल कमजोर हो सकते हैं। टैक्स: स्लैब रेट पर, ₹5000 से ऊपर TDS 10%।

निवेश टिप्स

लॉन्ग-टर्म के लिए चुनें, डिविडेंड हिस्ट्री चेक करें। विविधीकरण रखें।

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