म्यूचुअल फंड के प्रकार
म्यूचुअल फंड कई प्रकार के होते हैं, जो एसेट क्लास, जोखिम और लक्ष्य के आधार पर वर्गीकृत हैं। मुख्यतः इक्विटी, डेट, हाइब्रिड और विशेष फंड शामिल हैं।
एसेट क्लास के आधार पर प्रकार
- इक्विटी फंड: शेयरों में निवेश, उच्च रिटर्न लेकिन जोखिम (लार्ज कैप, मिड कैप, स्मॉल कैप, मल्टी कैप)।
- डेट फंड: बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज में, स्थिर आय व कम जोखिम।
- हाइब्रिड फंड: इक्विटी व डेट का मिश्रण, संतुलित विकास।
निवेश उद्देश्य के आधार पर
- इंडेक्स फंड: निफ्टी या सेंसेक्स को ट्रैक, कम लागत।
- ELSS (टैक्स सेविंग): 80C छूट, 3 वर्ष लॉक-इन।
- सेक्टोरल/थीमैटिक: IT, फार्मा जैसे विशिष्ट क्षेत्र।
- लिक्विड फंड: शॉर्ट-टर्म पार्किंग, उच्च लिक्विडिटी।
| प्रकार | जोखिम | उपयुक्त लक्ष्य |
|---|---|---|
| इक्विटी | उच्च | लॉन्ग-टर्म विकास |
| डेट | कम | स्थिर आय |
| हाइब्रिड | मध्यम | संतुलित पोर्टफोलियो |
अपने जोखिम सहनशीलता व लक्ष्य से मैच करें; डायरेक्ट प्लान चुनें।
Equity Funds
इक्विटी फंड्स म्यूचुअल फंड के वे प्रकार हैं जो मुख्य रूप से शेयर बाजार (स्टॉक) में निवेश करते हैं, उच्च रिटर्न के लिए लॉन्ग-टर्म उपयुक्त। ये विविधीकरण प्रदान करते हैं और फंड मैनेजर द्वारा प्रबंधित होते हैं।
इक्विटी फंड्स क्या हैं
ये फंड निवेशकों के पैसे इकट्ठा करके NSE/BSE पर लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में लगाते हैं। कम से कम 65% निवेश इक्विटी में होता है, बाकी डेट में। ऐतिहासिक रूप से 12-15% सालाना रिटर्न देते हैं, लेकिन बाजार उतार-चढ़ाव से प्रभावित।
प्रकार
- लार्ज-कैप: टॉप 100 कंपनियाँ (Reliance, HDFC Bank), स्थिर लेकिन कम रिटर्न।
- मिड-कैप: 101-250 रैंक, मध्यम विकास।
- स्मॉल-कैप: छोटी कंपनियाँ, उच्च रिटर्न लेकिन जोखिम भरा।
- सेक्टोरल: IT, फार्मा, बैंकिंग जैसे विशिष्ट क्षेत्र।
फायदे व जोखिम
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| फायदे | विविधीकरण, प्रोफेशनल मैनेजमेंट, लिक्विडिटी, कंपाउंडिंग |
| जोखिम | बाजार अस्थिरता, शॉर्ट-टर्म नुकसान; LTCG टैक्स 12.5% (>₹1.25 लाख) |
लॉन्ग-टर्म (5+ वर्ष) SIP से निवेश करें; नए निवेशकों के लिए लार्ज-कैप सुरक्षित।
Debt Funds
डेट फंड्स म्यूचुअल फंड के वे प्रकार हैं जो बॉन्ड, सरकारी सिक्योरिटीज और अन्य फिक्स्ड-इनकम साधनों में निवेश करते हैं। ये इक्विटी फंड्स से कम जोखिम वाले होते हैं और स्थिर आय प्रदान करते हैं।
डेट फंड्स क्या हैं
ये फंड मुख्यतः कॉर्पोरेट बॉन्ड, ट्रेजरी बिल, गिल्ट्स और कमर्शियल पेपर में निवेश करते हैं, जहाँ निश्चित ब्याज मिलता है। इक्विटी की तुलना में कम उतार-चढ़ाव, इसलिए सुरक्षित माने जाते हैं। औसत रिटर्न 6-8% सालाना।
प्रकार
- लिक्विड फंड: शॉर्ट-टर्म (91 दिनों तक), उच्च लिक्विडिटी।
- शॉर्ट ड्यूरेशन: 1-3 वर्ष, ब्याज दर जोखिम कम।
- कॉर्पोरेट बॉन्ड फंड: AAA रेटेड बॉन्ड, स्थिर आय।
- गिल्ट फंड: सरकारी सिक्योरिटीज, सबसे सुरक्षित।
फायदे व जोखिम
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| फायदे | स्थिर रिटर्न, उच्च लिक्विडिटी, टैक्स कुशल (LTCG इंडेक्सेशन) |
| जोखिम | ब्याज दर (रेट बढ़ने पर NAV गिरता), क्रेडिट रिस्क (डिफॉल्ट) |
शॉर्ट-टर्म लक्ष्यों (1-3 वर्ष) या रूढ़िवादी निवेशकों के लिए आदर्श। हमेशा उच्च रेटिंग वाले फंड चुनें।
Index Funds
इंडेक्स फंड्स म्यूचुअल फंड के वे प्रकार हैं जो निफ्टी 50 या सेंसेक्स जैसे बाजार सूचकांक को ट्रैक करते हैं। इनमें रिस्क कम होता है क्योंकि ये पूरे बाजार को कॉपी करते हैं, न कि एक्टिव स्टॉक चुनते हैं।
इंडेक्स फंड्स क्या हैं
ये पैसिव फंड होते हैं, जो इंडेक्स के स्टॉक्स को उसी अनुपात में खरीदते हैं। फंड मैनेजर का हस्तक्षेप कम होता है, इसलिए एक्सपेंस रेशियो (0.2-0.5%) बहुत कम। निफ्टी 50 इंडेक्स फंड टॉप 50 कंपनियों में निवेश करता है।
रिस्क कम क्यों होता है
- विविधीकरण: 30-50 स्टॉक्स में फैला निवेश, एक कंपनी के गिरने से पूरा फंड प्रभावित नहीं।
- पैसिव मैनेजमेंट: स्टॉक पिकिंग एरर नहीं, बाजार औसत रिटर्न (12-14%) मिलता है।
- कम लागत: एक्टिव फंड्स से 1-2% ज्यादा रिटर्न बचत लॉन्ग-टर्म में।
प्रकार
नए निवेशकों के लिए SIP से शुरू करें—लॉन्ग-टर्म में एक्टिव फंड्स को मात देते हैं।
ELSS (Tax Saving): टैक्स बचाने के लिए सबसे अच्छे म्यूचुअल फंड्स (Section 80C)।
ELSS (Equity Linked Savings Scheme) इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड हैं जो Section 80C के तहत टैक्स बचत देते हैं। ये टैक्स सेविंग के साथ लॉन्ग-टर्म धन वृद्धि प्रदान करते हैं।
ELSS क्या हैं
ELSS फंड कम से कम 80% निवेश शेयरों में करते हैं, 3 वर्ष का सबसे कम लॉक-इन पीरियड। ₹1.5 लाख तक निवेश पर 80C से टैक्स छूट (अधिकतम ₹46,800 बचत) मिलती है। ये PPF/FD से बेहतर क्योंकि इक्विटी ग्रोथ मिलता है।
टैक्स लाभ
- Section 80C: वार्षिक ₹1.5 लाख तक कटौती (PPF, NSC के साथ कुल सीमा)।
- LTCG टैक्स: 1 वर्ष बाद 12.5% (>₹1.25 लाख गेन पर); पहले छूट।
फायदे व प्रकार
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| लॉक-इन | 3 वर्ष (सबसे कम) |
| रिटर्न | 12-15% औसत (इक्विटी जैसे) |
| जोखिम | मध्यम (इक्विटी एक्सपोजर) |
टॉप ELSS फंड्स: Quant ELSS, SBI Long Term Equity, Mirae Asset ELSS (पिछले 5 वर्ष के प्रदर्शन पर)। SIP से शुरू करें।
Small Cap vs Mid Cap vs Large Cap
स्मॉल कैप, मिड कैप और लार्ज कैप म्यूचुअल फंड्स कंपनी के मार्केट कैप के आधार पर वर्गीकृत होते हैं। अपनी रिस्क क्षमता के अनुसार सही फंड चुनने से पोर्टफोलियो संतुलित रहता है।
मुख्य अंतर
SEBI के अनुसार, लार्ज कैप टॉप 100 कंपनियाँ (स्थिर, कम जोखिम), मिड कैप 101-250 (मध्यम विकास), स्मॉल कैप 251+ (उच्च वृद्धि लेकिन जोखिम भरा)।
| प्रकार | जोखिम स्तर | रिटर्न संभावना | उपयुक्त निवेशक |
|---|---|---|---|
| लार्ज कैप | कम | 10-12% | नए/रूढ़िवादी, 40+ उम्र |
| मिड कैप | मध्यम | 12-15% | संतुलित, 30-40 उम्र |
| स्मॉल कैप | उच्च | 15-20%+ | आक्रामक, युवा (20-30 उम्र) |
रिस्क के हिसाब से चुनाव
- कम रिस्क सहनशीलता: 70-80% लार्ज कैप (Reliance, HDFC जैसे), 20% मिड कैप। स्थिरता चाहिए तो SIP से शुरू।
- मध्यम रिस्क: 50% लार्ज, 30-40% मिड, 10-20% स्मॉल। बैलेंस्ड ग्रोथ।
- उच्च रिस्क: 30-40% लार्ज, 40% मिड, 20-30% स्मॉल। लॉन्ग-टर्म (7+ वर्ष) में अधिक लाभ।
युवा निवेशक स्मॉल/मिड पर फोकस करें, रिटायरमेंट के करीब लार्ज कैप बढ़ाएँ। हमेशा 5-7 फंड्स में डाइवर्सिफाई करें।
